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गोपाल भाई साहब से मिलकर और उनके द्वारा बताये गए पूजा-पाठ और अनुष्ठान से मेरा जीवन ही बदल गया । कहाँ मुझे क़र्ज़ और मानसिक तनाव से बिलकुल ही तोड़ दिया था और उसके बाद से मैं कहाँ से कहाँ पहुँच गया । सब श्रेय भाई साहब को है । यहाँ रूस आकर मेरे सब कस्ट दूर हो गए हैं । सब क़र्ज़ दूर हो गए फरीदाबाद में एक बहुत ही अच्छा घर ले लिया । सब तरफ से प्रभु ने दिया है अब ।
*बलदेव, मॉस्को
मुझे याद है जब इंटर में निकलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था । गोपाल अंकल से मिलकर मेरा जीवन ही बदल गया । आज मैं एक सफल इंजीनियर हूँ और जयपुर में एक अच्छी नौकरी पर हूँ । उनके बताये पूजा-पाठ को अब मैंने जीवन का एक अंग बना लिया है । मैं ही जनता हूँ कि मुझे क्या मिला है । अंकल को कोटिश नमन ।
*चिराग़, जयपुर
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*Sanjay Sharma, Haridwar/Delhi
पूज्य श्री गोपाल राजू जी द्वारा बताये गए चमत्कारी बजरंग बाण से मेरे परिवार व मुझे रोज़गार की प्राप्ति हुई । ये पाठ समस्त प्रकार की विपत्तिओं का नाश करने वाला है । चाहे वह भौतिक हो या अलौकिक । ये करने से केंद्रीय रिज़र्व पोलिस में मेरी नौकरी लगी । घर में बहनों की शादी ग़रीबी के कारन नहीं हो पा रही थी, पाठ के चमत्कार से बिना दहेज़ उनकी शादी हो गयी । जय श्री राम । जय हनुमान ।
*भारत भजन, सी आर पी एफ, दिल्ली
I was absolutely mentally and physically depressed. But after performing small things provided by Gopal ji, I have developed tremendous change in me. I cannot explain in words the lacking and favorable changes in me after his puja etc.
*Asha Sharma, Meerut
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*Anu Chaurasia, Delhi
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*Meenu Maheswary, Ahmedabad



शनि कष्टकारी नहीं बल्कि परम कल्याणकारी है

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मानसश्री गोपाल राजू

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शनि कष्टकारी नहीं बल्कि परम कल्याणकारी है

     सामान्य से प्रचलित नियम के अनुसार लग्न, सूर्य और चन्द्र तथा चलित नाम राशियों से विभिन्न राशियों पर शनिग्रह की गोचरवश स्थितियाँ शनि की साढ़े साती अथवा शनि की ढइया कहलाती हैं। सामान्यतः यह भय और भ्रम भी जनमानस में व्याप्त है कि शनिग्रह की गोचरवश यह स्थितियाँ व्यक्ति के लिए सदैव कष्टकारी होती हैं। उनके कार्य या तो सिद्ध नहीं होते और होते भी हैं तो वह  बहुत विलम्ब से अथवा कठिनाइयों से । उनके जीवन का इस काल के मध्य सारा विकास अवरूद्ध हो जाता है। यह अवधि व्यक्ति दुःख, रोग, शोक, दारिद्रय मानसिक संत्रास, अपमान आदि में व्यतीत करता हैं ।

    व्यक्ति की औसत आयु यदि 90 वर्ष मानें तो इस प्रकार शनि के निश्चित परिपथ पर भ्रमण काल के मध्य वह अपने जीवन के 22 1ध्2 वर्ष साढ़े साती और 15 वर्ष शनि की ढइया काल में व्यतीत करेगा। इस गणित से उसके जीवन के 37 1ध्2 वर्ष तो शनिग्रह जनित इस तथाकथित दोष में ही व्यतीत हो गये। फिर उसके जीवन में शेष क्या बचा रह गया। किसी को शनिग्रह से सम्बन्धित इस दोष का यदि गम्भीरता से भययुक्त दोष स्पष्ट करवा दिया जाए तब उसकी मनःस्थिति का आप स्वयं ही अनुमान लगा सकते हैं । शनि के दोष से न भी मरता होगा, उसके भय से तो वह निश्चित ही मर जाएगा । जैसा कि साँप के विषय में सर्वविदित है - ''काटने से नहीं मरा, उसके भय से मर गया''

    जातक ग्रथों में शनि के इस तथाकथित् दोष  और उनसे उत्पन्न शुभाशुभ की जो स्थितियाँ बनती हैं यदि उन सबको जोड़ लिया जाए तो मूलतः वह चार प्रकार की बनती हैं। शुभाशुभ का यह प्रभाव जन्मपत्री में स्थित ग्रहों की बलाबल स्थितियों पर अधिक निर्भर करता है। जन्मपत्री में जन्मराशि (अथवा अन्य वह राशियाँ जिनसे शनि के गोचर का शुभाशुभ विचार किया जा रहा है।) शुभ हो अर्थात षडवर्ग में बलवान हो और चलित नाम राशि अशुभ हो। दूसरे जन्म राशि और चलित नाम राशियाँ दोनों ही शुभ हों, तीसरे जन्म राशि अशुभ हो और  चलित नाम राशि शुभ हो और चौथे जन्म राशि और चलित नाम राशियाँ दोनों ही अशुभ हों।

 शनिग्रह के गोचर का शुभाशुभ प्रभाव वस्तुतः इन चार बातों के अध्ययन पर अधिक निर्भर करेगा। अधिकाशतः देखने में यही आता है कि शनि के गोचर प्रभाव को कहने से पहले यह अथवा इन जैसी अनेक अन्य ग्रहों की बलाबल स्थितियों को तो छोड़ दिया जाता है और शनि की ढइया अथवा साढ़े साती की एक स्थिति विशेष को बस शनि का भूत अथवा उसके भय का हौवा बना दिया जाता है ।

    कुल परिणाम यह स्पष्ट होता है कि शनि का गोचर प्रायः कष्टकारी ही नहीं होता। अनेकों ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं कि शनि की इन विपरीत गोचर स्थितियों में व्यक्ति ने सफलता की अनेकों सीढ़ियाँ पार की हैं। इन विपरीत शनि के काल में भी व्यक्तियों केा सुख, ऐश्वर्य, मान, सम्मान आदि सब कुछ उपलब्ध हुए हैं।

    देखा जाए तो शनि भौतिकवाद का प्रतीक है। अर्थ, काम, मोह आदि के कारण व्यक्ति के कर्म एक जन्म के न होकर जन्म-जन्मान्तर, युग-युगान्तर से संचित होते रहते हैं। इन संचित कर्मो के अनुसार ही शनिग्रह उन शुभाशुभ कर्मों के अनुरूप  वर्तमान में भोग करवाता है । अपने दैनिक जीवन में हम सब देख और सुन ही रहे हैं कि कोई व्यक्ति रंक से राजा हो गया और कोई राजा से रंक। जातक ग्रथों में शनि ग्रह को इन स्थितियों में पहुँचाने का दायित्व शनिग्रह को माना है। कर्मो के अनुरूप फल देने के कारण ही इसको न्यायाधीश भी कहा गया है। यह शुभाशुभ फल कब देगा इस सबकी गणना जन्मपत्री में शनिग्रह की दशा, अन्तर्दशा और विभिन्न राशियों में गोचरवश स्थितियों के आधार पर की जा सकती है ।

    विधि का यह नियम है कि यदि कोई समस्या है तो उसका निदान भी कहीं न कहीं अथवा किसी न किसी रूप में अवश्य उपलब्ध है। आवश्यकता है केवल पहले समस्या के उचित कारण जानने की और तदनुसार उसके निराकरण के उपाय तलाशने की । यदि वास्तव में शनिग्रह के भूतभय से अलग शनिग्रह जनित दोष के कारण कोई पीड़ा झेल रहे हैं तो वह कुछ उपाय अपनी सुविधानुसार अवश्य कर लें। कौन सा उपाय आप चयन करें यह आपके अपने-अपने बुद्धि और विवेक पर अधिक निर्भर करेगा। परन्तु जो कोई भी उपाय आप करें उसके प्रति यह श्रद्धा और आस्था अवश्य बलवती रखें  कि आपको जटिल समस्या का उचित समाधान मिल गया है और उससे आपके कष्ट अवश्य ही दूर होंगे।

1. हनुमान जी का 'ऊँ हं पवन नन्दनाय नमः' मंत्र जाप किया करें।

2. हनुमान जी की पूजा क्रम में हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, सुन्दरकाण्ड, हनुमान कवच, हनुमान बाहुक, बजरंग बाण, हनुमान स्तोत्र आदि का पठन-पाठन सर्वविदित है। आप शनिग्रह दोष निवारण हेतु जो भी कर रहे हैं, सब अच्छा है। परन्तु इन सबमें बजरंगबाण सर्वाधिक प्रभावशाली सिद्ध हुआ है, ऐसा अनेक बार लोगों का स्वयं का अनुभव सामने आया है।

3. मत्स्य पुराण के अनुसार पीड़ाकारक ग्रह की शान्ति और पुष्टि दोनों  के लिए  लक्ष्मी  कृपा और दीर्घायुष्य के लिए ग्रह यज्ञ का विधान है । किसी योग्य व्यक्ति द्वारा इसका विधान समझकर यह स्वयं भी किया जा सकता है।

4. यदि शनिदोष की पीड़ा है तो यह भ्रम मन से बिल्कुल निकाल दें कि मात्र शनिवार के दिन कुछ क्रम-उपक्रम कर लेने से समस्या का समाधान हो जाएगा। बौद्धिकता से स्वयं मनन करें कि क्या शनिग्रह घात में बैठा रहता है कि कब शनिवार आए और वह अपना उत्पात प्रारम्भ कर दे । शनिग्रह पीड़ा से ग्रसित हैं तब तो वह आठों पहर और चौबीसों घड़ी पीड़ा देगा ही देगा।

5. एक लोहे का पात्र लेकर उसमें शनिस्वरूप आकृति स्थापित कर लें। नित्य प्रातः काल उठकर थोड़े से तेल में अपनी छाया पर जाटक करें और भाव बलवती करें कि आपके शनि ग्रह जनित समस्त दोषों का पलायन हो रहा है। यह भावना करते हुए पात्र में तेल छोड़ दें। यह नियम यथासम्भव नित्य प्रति के अपने अन्य दैनिक कर्मो के साथ जोड़ लें। जब पात्र भरने लगे तो किसी शनिदान वाले को दिन के समय यह दान कर दें।

6. शनिग्रह पीड़ा निवारण के लिए शनि गायत्री, वेदोक्त अथवा बीज मंत्रो का सतत् जाप एक अच्छा और सशक्त उपाय सिद्ध होता है।

     शनि गायत्री - ऊँ कृष्णांगाय व्द्मिहे रविपुत्राय धीमहि

                   तनः सौरिः प्रचोदयात्।

     वेदमंत्र - ऊँ शन्नो देवीरभिष्टयआऽपो भवन्तु

              पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तु नः।

     बीज मंत्र - ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

 

    अन्त में यह बात सदैव ध्यान रखें कि शनि अतुलित भौतिक सुख वैभव आदि देता है परन्तु यही सुखों की कामना और सतत् लालसा जब हवस बन जाती है तब उन संचित दुष्क्रर्मों का दण्ड देने के लिए शनि एक क्रूर न्यायधीश बन जाता है। और उचित न्याय करता है।

    शनि राखे संसार में हर प्राणी की खैर।

    न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।।

    शनि ग्रह को यदि वास्तव में हमने जान लिया तो शनि शत्रु नहीं अपितु मित्र और विनाश अथवा कष्टकारी नहीं बल्कि परम कल्याणकारी सिद्ध होने लगेगा।

मानसश्री गोपाल राजू


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