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Gopal uncle has changed my life completely. Once I was depressed in my life but with guidance of him now I am working in one of the biggest Oracle Group with a handsome package.
*Sandeep Singh, Banglore
Dear uncle Sadar Pranam | I am regularly using your ring for the last 7 years and getting very favorable results. Since the ring is quite old. Please advice should I change this. However I do not want to put it off even for a moment, I have this much faith on you and in your lucky gemstone analysis.
*Prashant Jain, Denmark
I am Bhawna Tyagi. 90% satisfy after puja done for me by Mr Gopal Raju.
*Bhawna Tyagi, Roorkee
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*Er. Pramod Kumar, Dehradun
गोपाल जी ने तीन बार बस्तर में पूजा-अनुष्ठान करवाये हैं । मुझे आज क्या मिला है यह लिखकर नहीं देखकर समझा जा सकता है । जगदलपुर में मै. सजावट का आज का ये रूप उस पूजा-पाठ का ही परिणाम है । उनकी किताब के एक छोटे से प्रयोग ने दिन-ब-दिन हमारे उन्नति के रास्ते खोल दिए थे । उस चमत्कारी प्रभाव से प्रेरित होकर ही मैं उनसे मिला था । गोपाल जी का व्यक्तित्व मैग्नेटिक प्रभाव वाला है और उनके क्रम, उपक्रम, लेखन आदि सब विलक्षण हैं और सबसे अलग ।
*सत्यपाल मग्गू, जगदलपुर, बस्तर
Your astrological guidance has turned our life. Like previous days our family is leading now good time.
*Garima Sharma, Roorkee
My sincere regards and thnks for your support and guidance. I am feeling much better and getting unexpected favorable results.All because of your blessings. In gratitude....
*A. K. Doval, New Delhi



योगिनी दशा साधना तंत्र

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(गोपाल राजू की पुस्तक 'सरलतम साधना तंत्र' से)

 

    सरलतम साधना तंत्र से सांसरिक दुःखों से मुक्ति पाने के लिए योगिनी साधना एक सम्पूर्ण साधना मानी गयी है। माता, बहन, पुत्री आदि जिस भाव से उनकी साधना-उपासना की जाए उस रूप में ही सदैव प्रसन्न होकर वह साधक का कल्याण करती हैं। परन्तु सर्वश्रेष्ठ यह होता है कि साधक किसी एक रूप विशेष में ही योगिनी साधना करें।

योगिनियों के नाम

    योगनियाँ अनेक रूप और नाम की अध्यात्म, योग तथा अन्य गुह्य विषयों में चर्चित हैं जैसे योग साधक का योगी इसी प्रकार योग साधिका को सामान्यतः लोग योगिनी सम्बोधित कर देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में जैसे जातक की विंशोत्तरी दशा, अष्टोत्तरी दशा, चर दशा, महादशा आदि दशाएं जन्म से जीवन के अन्तिम समय तक क्रमशः एक निश्चित क्रम में आती रहती हैं, इसी प्रकार योगिनी दशाएं भी जीवन में निरन्तर घटित होकर प्रभावी रहती हैं। कुछ योगनियाँ वह हैं जो महाविधाओें के साथ निवास करती हैं।कुछ वह हैं जो साधना करते-करते शरीर त्याग देती हैं और साधना पूर्ण नहीं कर पातीं अथवा जिनकी साधना पूर्ण हो जाती है परन्तु किन्हीं त्रुटि के कारण उनकी सद्गति नहीं हो पाती अथवा उनका पुनर्जन्म नहीं हो पाता। कुछ शक्तियों के नाम विशेष जो संख्या में कुल 64 हैं को भी योगिनी कहते हैं। तंत्र क्षेत्र में यह 64 योगिनियों के नाम से विख्यात हैं। इनकी साधनाओं का सरल विवरण मैंने अपनी पुस्तक 'तंत्र साधना' में भी दिया है।

    प्रस्तुत लेख में जातक दशा चक्रिणी योगिनयों का सरली करण दें रहा हूँ। योगिनी दशाओं भोग का एक निश्चित समय निर्धारित है। ज्योतिष शास्त्र की दशाओं की तरह योगिनी दशाएं भी अपने समय काल में सुख और दुःख का जातक को उनके कर्मानुसार फल देती हैं। योगिनी दशाओं कि कुल संख्या 8 है। इनमें से कोई सिद्ध दायिनी है, कोई मंगलकारक है, कोई कष्टकारी है, कोई सफलता प्रदायक आदि है। जीवन की सफलता के लिए यदि इनकी साधना कर ली जाए तो साधक के लिए यह बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध होती हैं। जन्म पत्री में जिस योगिनी की दशा चल रही है उसकी पूजा-अर्चना करने की सरलतम विधि पाठकों के लाभार्थ दे रहा हूँ।

    योगिनी अत्यन्त सामान्य से नियमानुसार निम्न प्रकार से सुख-दुःख अपनी दशा में देती हैं-

1. मंगला - मंगला देवी की कृपा जिस व्यक्ति पर हो जाती है उसको हर प्रकार के सुखों से सम्पन्न कर देती हैं। यथाभाव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति मंगल ही मंगल भोगता है।

2. पिंगला - पिंगला देवी की कृपा से सारे विघ्न शांत हो जाते हैं। धन-धान्य और उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

3.धान्या - धान्या देवी की कृपा से धन-धान्य की कभी क्षति नहीं होती है।

4. भ्रामरी - यदि भ्रामरी दशा में देवी की कृपा हो जाए तो शत्रु पक्ष पर विजय, समाज में मान-सम्मान तथा अनेक लाभ के अवसर आने लगते हैं।

5. भद्रिका - शत्रु का शमन और जीवन में आए समस्त व्यवधान समाप्त होने लगते हैं, यदि देवी की कृपा हो जाए।

6. उल्का - कार्यों में किसी भी प्रकार से यदि व्यवधान आ रहे हैं और अपनी दशा में उल्का देवी की व्यक्ति पर कृपा हो जाए तो तत्काल व्यक्ति के समस्त कार्यों में गति आने लगती है।

7. सिद्धा - सिद्धा दशा में परिवार में सुख-शान्ति, कार्य की सिद्धि, यश, धन लाभ आदि में आश्चर्यजनक रूप से फल मिलने लगते हैं। परन्तु सम्भव यह उस दशा में ही सम्भव है जब देवी की कृपा हो जाए।

8. संकटा - यथानाम रोग, शोक और संकटों के कारण इस दशा का समय काल व्यक्ति को त्रस्त करता है। संकटों से मुक्ति के लिए मातृ रूप में योगिनी की पूजा करें तो देवी की कृपा होने लगती है।

    योगिनी दशाओं को अनुकूल बनाने के लिए यथा भाव, सुविधा और समय निम्न प्रकार से साधना करें।

किसी शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से पूर्णिमा तक प्रत्येक योगिनी दशा के कारक ग्रह के दिन से सम्बन्धित योगिनी दशा के कारक ग्रह के पांच-पांच हजार मंत्र पूरे कर लें। संकटा दशा के कारक ग्रह के लिए रविवार राहु के लिए तथा मंगलवार केतु के लिए चुनें। इसी प्रकार मंगला के कारक ग्रह चन्द्रमा के लिए सोमवार, पिंगला के लिए रविवार, धान्या के कारक ग्रह गुरू के लिए गुरूवार, भ्रामरी के मंगल के लिए मंगलवार, भद्रिका के ग्रह बुध के लिए बुधवार, उल्का के शनि ग्रह के लिए शनिवार और सिद्धा के लिए शुक्रवार चुनें।

    योगिनी दशाओं का कुल समय काल 1 वर्ष से आरम्भ होकर क्रमशः 2, 3, 4, 5, 6, 7, और 8 वर्षों का होता है। जितने वर्ष तक योगिनी दशा का समय जन्मपत्री के अनुसार चल रहा है उतने वर्षों में निरन्तर नहीं तो अपनी समय की सुविधानुसार कुछ-कुछ अन्तराल से योगिनी दशाओं के समय काल में उनके मंत्र जप अवश्य करते रहें। साधना वांछित मंत्र जप साधना के लिए पीला आसन तथा गोघृत का दीपक जलाकर बैठें। सम्भव हो तो एक नवग्रह यंत्र अपनी पूजा में ध्यान के लिए स्थापित कर लें। जप के बाद प्रत्येक दिन पांच देवी रूप कन्याओें को भोजन करवाकर उनकी प्रसन्नता और आशीर्वाद लें। अन्तिम अर्थात् पूर्णिमा को नवग्रह यंत्र अपनी पूजा में स्थाई रूप से स्थापित कर दें। तदन्तर में नित्य एक माला उस योगिनी देवी की करते रहें जिनकी दशा आप भोग रहे हैं।

जप मंत्र

मंगला -

ऊँ नमों मंगले मंगल कारिणी, मंगल मे कर ते नमः

पिंगला -

ऊँ नमो पिंगले वैरिकारिणी, प्रसीद प्रसीद नमस्तुभ्यं

धान्या -

ऊँ धान्ये मंगलकारिणी, मंगलम मे कुरु ते नमः

भ्रामरी -

ऊँ नमो भ्रामरी जगतानामधीश्वरी भ्रामर्ये नमः

भद्रिका -

ऊँ भद्रिके भद्रं देहि देहि, अभद्रं दूरी कुरु ते नमः

उल्का -

ऊँ उल्के विघ्नाशिनी कल्याणं कुरु ते नमः

सिद्धा -

ऊँ नमो सिद्धे सिद्धिं देहि नमस्तुभ्यं

संकटा -

ऊँ ह्रीं संकटे मम रोगंनाशय स्वाहा

 

मानसश्री गोपाल राजू

 

 


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