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*तांत्रिक बहल, दिल्ली



नज़र दोष से छुटकारा कैसे पायें

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     नज़र दोष से छुटकारा कैसे पायें

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    क्या यह सब सत्य है, मन का वहम है अथवा अंधविश्वास ? जो कुछ भी सार-सत है इस विषय के पीछे, वह एक अलग विषय है। परन्तु यह सत्य है कि अच्छे-अच्छे बौद्धिक वर्ग, विषय को न मानने वाले नास्तिक और यहाँ तक अनेक धर्मावलम्बियों को नज़र दोष के भय से पीड़ित होते देखा गया है और नहीं तो कम से कम वह भयभीत अवश्य हैं किसी अज्ञात भय के कारण।

नजर किसको लगती है

    यह तो सत्य है कि कमजोर मानसिकता वाले व्यक्ति को इस प्रकार की अनहोनी बातें कहीं न कहीं अवश्य सताती हैं। अनेकों अच्छे-भले खेलते-खाते बच्चों को अकारण रोगी होते, दर्द-पीड़ा से छटपटाते अथवा अज्ञात भय से भयभीत होते अवश्य देखा जाता है। अच्छी भली अनेक महिलाओं को कहते सुना होगा कि आज श्रृगांर करके निकली थी और अमुक की नज़र लग गयी फलस्वरूप  सिर दर्द अथवा अन्य कष्ट से पीड़ित हैं तब से। अच्छा भला कारोबार चल रहा था, अकस्मात् किसी की नज़र लग गयी और सब व्यवसाय चौपट हो गया।

अधिकांशतः महिलाओं और बच्चों को नज़र दोष से पीड़ित होते देखा जाता है। महिलाओं को तीन स्थितियों में सर्वाधिक नज़र दोष का प्रकोप होता है। एक तो जब वह विवाह के समय श्रृंगार किए हुए शादी के जोड़े में होती हैं। दूसरे जब वह गर्भवती होती हैं और तीसरे बच्चा होने के बाद के कुछ दिनों में, विशेषकर जब तक दूध मुहा बच्चा दुग्धपान करता है। पीड़ित स्थितियों में तीन बातों का भ्रम बना रहता है, इसलिए यह समझना कठिन हो जाता है कि पीड़ित करने के पीछे कौन से कारक भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि तीनों ही स्थितियों में पीड़िता की स्थिति लगभग एक सी ही रहती है। पीड़ा का कम अथवा अधिक होना तो निर्भर करता है व्यक्ति की मानसिकता और इच्छाश्शक्ति पर। तीन कारणों में एक में अधिकांशतः कह दिया जाता है कि किसी ने 'कुछ' कर दिया ।  दूसरे में कहा जाता है कि किसी दुष्टआत्मा का प्रभाव है और तीसरा तो नज़र दोश है ही।

    जन्मपत्री में जिनके राहु और चन्द्रमा दोषपूर्ण होते हैं तथा जो मानसिक रूप से अपरिवक्व होते हैं अथवा जिनमें इच्छा शाक्ति की कमी होती है, प्रायः उनको नज़र पीड़ा सताती है, ऐसा देखा गया है।

लक्षण क्या हैं नज़र दोष के

    आलस्य, सिर दर्द, किसी कार्य में मन न लगना, हर समय शरीर बिना किसी रोग के रोगी की तरह दिखना। मन अशान्त रहना। प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास और उत्साह का पलायन हो जाना। सबसे बड़ा लक्षण है आँखों में सदा भारीपन बना रहना और परिणामस्वरूप उनका सूज जाना। नज़र लगे बच्चे, महिला अथवा किसी इंसान की मात्र आँखे देख कर सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि वह नज़र दोष से पीड़ित है।

    भवन, कार्य स्थल, दुकान आदि के साथ-साथ घर के जीव-जन्तु और यहाँ तक कि वनस्पति तक पर नज़र दोष का दुष्प्रभाव पड़ता है। किसी एक्वेरियम में मछलियों का मरना, घर की फुलवारी के फल-पौधों का अकस्मात् सूख जाना, घर के पालतू जानवरों का बीमार हो जाना आदि नज़र दोष के सामान्य से लक्षण हैं।

नज़र दोष का तार्किक आधार क्या है

    हमारा शरीर असंख्य रोम कूपों से बना है। यह रोमकूप शरीर के बेकार और विषैले पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करते हैं। किन्हीं कारणों से यदि यह छिद्र बन्द हो जाते हैं तो शरीर में प्राकृतिक वायु, सर्दी अथवा गर्मी का आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। आन्तरिक और वाह्य तापमान का इससे सामनजस्य बिगड़ जाता है अथवा कहें कि पंच तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है इससे शरीर में लोह तत्व की अधिकता होने लगती है। रोमछिद्र तो क्योंकि बन्द होते हैं इसलिए विषैले तत्व का निष्काशन शरीर के अन्य भागों से, विशेषकर सबसे नाज़ुक अंग आँख के द्वारा होने लगता है। परिणाम स्वरूप आखों की पलके भारी होने लगती हैं, लाल हो जाती है अथवा उनमें सूजन आने लगती है।

    छोटे बच्चे अकस्मात् बीमार हो जाते हैं। खाना-पीना छोड़ देते हैं। रात-रात तक न सोते हैं न ही किसी को सोने देते हैं। रो रो कर बुरा हाल कर देते हैं। अच्छे से अच्छी चिकित्सा के बाद भी कोई प्रभाव बच्चे के स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता है। उस समय न मानने वाला भी हारकर मानने लगता है कि बच्चे को नज़र लगी है।

नज़र दोष उपाय का सिद्धांत

    पदार्थ तंत्र में अगर जाएंगे तो इस बात की प्रमाणिकता सामने आ जाएगी कि प्रत्येक प्रदार्थ में अपनी एक ग्राह्य शक्ति होती है और प्रत्येक पदार्थ से हर पल विकरण होता रहता है। यह अनवरत वैज्ञानिक प्रकिया है। कुछ पदार्थ जैसे नींबू, नमक, तेल, फिटकरी, लहसुन, मोर के पंख, सरसों का तेल आदि ऐसे हैं जिनमें नज़र दोष को न्यून करने का प्राकृतिक गुण-धर्म विद्यमान है। इसीलिए नज़र उतारने के लिए इनका प्रयोग अधिकांशतः किया जाता है।

नज़र दोष के सरलतम उपाय

    अगर कहीं लगता है कि कष्टों के पीछे नज़र दोष कारण है और दवा आदि करके आप थककर त्रस्त हो चुके हैं तब पूरी आस्था से निम्न कुछ उपाय अवश्य अपना करे देखें। क्या पता किस उपाय से आपको कहाँ लाभ मिल जाएं।

1. रात्रि सोने से पूर्व नज़र दोष से पीड़ित बच्चा, महिला, पुरूष जो कोई भी है लेट जाए। घर का कोई सदस्य, यदि वह घर का कोई बुजुर्ग हो तो बहुत अच्छा, अपना जूता पीड़ित के ऊपर से घड़ी की विपरीत दिशा में सिर से पांव तक 5, 7, 11 अथवा अधिक बार विषम संख्या में उतार कर कमरे से बाहर जोर से फेक दे। अपने हाथ-पैर धोले और निःशब्द सोने चला जाए।

2. पीड़ित यदि छोटा दूध पीता बच्चा है तो उसके गले में कुछ लहसुन की ताजी कलियाँ एक धागे में माला की तरह पिरोकर उसके गले में धारण करवा दीजिए,  बच्चे पर नज़र दोष का दुष्प्रभाव नहीं होगा । जब लगे कि कलियाँ सूखने लगें तो उनको ताज़ी से बदल दिया किजिए।

3. एक बिना दाग का एक नींबू लीजिए । पीड़ित व्यक्ति के ऊपर उससे उतारा करिए अर्थात् घड़ी की सुइयों की घूमती दिशा में उसके ऊपर से धीरे-धीरे विषम संख्या में सिर से पांव तक घुमाइए। तीन पिन, एक ऊपर, एक बीच में तथा एक नीचे चुभाकर उसको घर में कहीं रख दीजिए। जैसे-जैसे नींबू सूखेगा। नज़र दोष का दुष्प्रभाव न्यून होने लगेगा। कुछ दिन बाद नींबू को किसी चौराहे पर फेंक कर निःशब्द लौट आइए। यदि प्रभाव में कहीं न्यूनता लगे तो उपाय पुनः दोहरा दीजिए।

4. जो लोग प्रभू में आस्थावान हैं। जिनके घर में नियमित पूजा-पाठ, आरती आदि होती, वहाँ नज़र दोष का प्रभाव तो कभी होता ही नहीं है। बस मन में आस्था अवश्य होना चाहिए । हनुमान जी का किसी भी रूप से ध्यान, आराधना, पूजा, पाठ, जप आदि घर में यदि गूगुल की धूनी के साथ नियमित रूप से किया जाता है, तो वहाँ नज़र दोष का दुष्प्रभाव होगा ही नहीं। पंच मुखी हनुमान जी पंच तत्वों का कारक कहे गए हैं। इन पंच तत्वों में ही अण्ड-पिण्ड का सिद्धांत छिपा है। पंच मुखी हनुमान जी का कोई चित्र भवन, दुकान, घर आदि में कहीं ऐसे स्थान पर लगा लें जहाँ से आते-जाते उनके दर्शन होते रहें। जब पंच तत्वों की शरीर और वातावरण से सन्तुलन बना रहेगा तो नज़र दोष का दुष्प्रभाव तो कभी सताएगा ही नहीं ।

5. घर का रात्रि का खाना सिमट जाने के बाद चांदी की कटोरी में दो लौंग तथा दो कपूर की टिक्की जला दिया कीजिए नज़र दोष के कारण यदि घर की उन्नति प्रभावित हुई है तो वह धीरे-धीरे दूर होने लगेगी।

6. बच्चा यदि नज़र दोष से पीड़ित है तो उसकी लम्बाई के सात कच्चे सूत लेकर सरसों के तेल में अच्छे से भिगोकर तर कर लें। बच्चे के सामने उसको चिमटे, पिन से अथवा कील से पकड़ कर दीवार पर टांग दें। उसके नीचे जल से भरा एक पात्र रख दें। धागे में आग लगा दें और उसका जला भाग जल में टपकने दें। बच्चे से कहें कि एक टक वह यह क्रिया देखता रहे । धागा पूरी तरह से जल जाए तो पात्र का पानी घर से बाहर किसी पेड़ की जड़ में छोड़ दें।

7. यदि रत्नों में विश्वास है तो पीड़ित के गले में ज़बरजद अर्थात् पैरीडोंट नामक रत्न धारण करवा दें।

8. अमावस्या के दिन एक पीले रंग के कपड़े  में साबुत नमक तथा नागकेसर रखकर पोटली बना लें। और यह घर में कहीं सुरक्षित रख लें। कुछ दिनों बाद अमावस्या को ही नए से यह पुनः बदल दिया करें। भवन, घर, दुकान, कार्यालय आदि यदि नज़र दोष से प्रभावित हुआ है तो वह पुनः ठीक होने लगेगा।

9. दुकान, कार्य स्थल आदि में नींबू तथा मिर्च लटकाते हुए प्रायः देखा जाता है। इसको यदि अधिक प्रभावशाली बनाना है तो पहले एक टीन, गत्ते अथवा अन्य का छोटा सा स्वास्तिक काट लें, उसपर आटे से नागकेसर के कुछ दाने चिपका दें। फिर इसके ऊपर क्रमशः एक नींबू तथा पांच या सात डण्डी सहित हरी मिर्च पीरों लें।

10. एक वृक्ष का काला गोल सा एक फल होता है । इसका नाम ही नज़रबट्टू होता है, यह पीड़ित के गले में धारण करवा दें।

11. दो लौंग, दो कपूर की टिक्की तथा थोड़ा सा फिटकरी का टुकड़ा लेकर नज़र दोष से पीड़ित के ऊपर से यह घड़ी की विपरीत दिशा में सिर से पैर तक उतारा करें और घर से बाहर जाकर जला दें। बची राख को अपने पैरों से मसल दें। मन में भावना जगाएं कि बुरी नज़र को अपने पैरों से मसल कर नष्ट कर रहे हैं।

12. छोटा बच्चा, विशेषरूप से नवजात शिशु नज़र दोष से पीड़ित है, सोते में चौककर रोने लगता है। तो ऐसे में श्वेतार्क की जड़ मुंगा, फिटकरी लहसुन, मोर का पंख सब एक कपड़े में सिलकर बच्चे के कमर अथवा गले में धारण करवा दें। नज़र दोष के लिए यह एक बहुत ही प्रभावशाली नज़रबट्टू सिद्ध होगा।


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